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पशुपालन, डेयरी एवं मछलीपालन करने वाले किसानों को किसान के्रडिट कार्ड उपलब्ध करवाने हेतु 15 नवम्बर से 15 फरवरी 2022 तक देशव्यापी एएचडीएफसी केसीसी अभियान

रायपुर/छ.ग./इस विशेष अभियान के तहत सभी पात्र पशुपालक किसानों को पशुओं के देखभाल के लिए ऋण प्रदान किया जाएगा एवं किसान के्रडिट कार्ड उपलब्ध कराये जाएंगे। केसीसी के लिए 1.60 लाख रूपए तक कोई कोलेटरल (जमीन के दस्तावेज या प्रसंस्करण इकाइयों के साथ टाई-अप) की आवश्यकता नहीं है। पशुपालक, मुर्गीपालक किसान (व्यक्ति व समूह, स्व सहायता समूह, संयुक्त देयता समूह) जिनके स्वयं के या किराये, लीज पर लिया गया शेड हो वह केसीसी के लिए पात्रता रखता है। एक उन्नत दुधारू गाय हेतु अधिकतम ऋण 25 हजार 750 रू, एक दुधारू भैंस हेतु अधिकतम ऋण 31 हजार 250 रू., बकरी, भेड़, हेतु अधिकतम ऋण 28 हजार 908 रू. एक सूकर इकाई (2़1) हेतु अधिकतम ऋण 39 हजार 480, एक पोल्ट्री इकाई (100) के लिए अधिकतम ऋण 10 हजार रूपए और मछलीपालन के लिए डेढ़ लाख प्रति हेक्टेयर ऋण लिया जा सकता है। पशुपालन हेतु केसीसी के लिए आवश्यक दस्तावेज 2 फोटो, आधार कार्ड, फोटो, बैंक पासबुक प्रथम पेज की छायाप्रति, शेड संबंधी भूमि संबंधित दस्तावेज आवश्यक है। इसी प्रकार मत्स्य पालन हेतु केसीसी के लिए 3 फोटो, आधार कार्ड, फोटो, बैंक पासबुक प्रथम पेज की छायाप्रति, तालाब का न...

मत्स्य कृषकों अब बिना ब्याज सहकारी समितियों से मिलेगा ऋण : मत्स्य पालन को कृषि का दर्जा मिलने से पानी और बिजली में भी छूट का लाभ

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रायपुर/छ.ग./छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा मत्स्य पालन को कृषि का दर्जा देने से मछुवारों एवं मत्स्य कृषकों को अपने मत्स्य कारोबार के लिए किसानों के समान सहकारी समितियों से शून्य प्रतिशत ब्याज पर न सिर्फ ऋण मिल सकेगा, बल्कि मत्स्य पालन के लिए सिंचाई जलाशयों से बिना किसी शुल्क के पानी और बिजली की भी सुविधा मिलेगी। इससे मत्स्य पालन को राज्य में बढ़ावा मिलने के साथ मत्स्य उत्पादन की लागत में कमी आएगी। जिसका सीधा लाभ मछुवारा एवं मत्स्य कृषकों को होगा। छत्तीसगढ़ शासन के इस निर्णय से धमतरी जिले के लगभग 8 हजार मत्स्य पालक लाभान्वित होंगे। धमतरी जिले तालाब और जलाशयों में मछली पालन किया जा रहा है, जो कि हजारों लोगों की आजीविका का साधन है। जिले के 3561 ग्रामीण तालाब, जिसका जलक्षेत्र 4322.172 हेक्टेयर है। इसमें से 3334 ग्रामीण तालाबों में मछली पालन किया जा रहा है। इसी तरह जिले में 50 सिंचाई जलाशयों में मछली पालन किया जा रहा है। मछली बीज उत्पादन एवं संचयन के लिए जिले में छः हैचरी हैं। इनमें सांकरा स्थित शासकीय मत्स्य बीज प्रक्षेत्र सह हेचरी में दो हैचरी, छत्तीसगढ़ मत्स्य महासंघ के अधीन देमार में दो हैचरी, ...

मछली पालन को कृषि का दर्जा, मत्स्य किसानों को मिलेगा पानी बिजली फ्री

जिले के 6,500 मत्स्य पालकों को मिलेगा लाभ रायपुर/छ.ग./मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल की केबिनेट ने 20 जुलाई को राज्य में मछली पालन को कृषि का दर्जा देने का बड़ा फैसला लिया है। इस फैसले से मछुआरों को मत्स्य पालन के लिए किसानों के समान ब्याज रहित ऋण सुविधा मिलने के साथ जल कर और विद्युत शुल्क में भी छुट का लाभ मिलेगा। जिले में मछली पालन को बढ़ावा मिलने के साथ ही 6,500 मत्स्य किसानों को इसका सीधा लाभ मिलेगा।      राज्य में मछुआरों की आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाने के उद्देश्य से नवीन मछली पालन नीति तैयार की जा रही है। इसका फायदा मछुआ जाति के लोगों और मछुआ सहकारी समिति को मिलेगा। मछली पालन में जुटे मछुआरों को सहकारी समितियों से ऋण एवं अन्य सुविधाएं मिल सकेंगी। मत्स्य पालन व्यवसाय से जुड़े जिले के साढ़े छः हजार मत्स्य पालक विभिन्न योजनाओं से लाभान्वित हो रहे हैं। जिले के 7,397 तालाबों और 86 जलाशयों में मत्स्य पालन किया जा रहा है तो हजारों लोगों की आजीविका का साधन बना हुआ है।      जिले में कृषि के साथ-साथ  तालाबों और जलाशयों में बड़ी संख्या में मछली पालन का कार्य किया ...

मछली पालन को कृषि का दर्जा मिलने से कृषकों में उत्साह : मत्स्य पालन से जुडे़ 13 हजार 3 सौ लोगों की स्थिति में होगा सकारात्मक बदलाव

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जगदलपुर/छ.ग./छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा राज्य में मछली पालन को कृषि का दर्जा दिया गया है। सरकार के इस फैसले से मछुआरों को मत्स्य पालन के लिए किसानों के समान ब्याज रहित ऋण सुविधा मिलने के साथ ही जलकर और विद्युत शुल्क में भी छुट का लाभ मिलेगा। इससे बस्तर जिले में मछली पालन को बढ़ावा मिलने के साथ ही इससे जुड़े 13 हजार 3 सौ लोगों की स्थिति में सकारात्मक बदलाव आएगा।  बस्तर जिले में बीते ढ़ाई सालों में छत्तीसगढ़ सरकार के प्रयासों से मछली पालन के क्षेत्र में उत्तरोत्तर वृद्धि हुई है। जिले में ढ़ाई सालों में मत्स्य बीज उत्पादन के मामाले में 18 प्रतिशत और मत्स्य उत्पादन में 6 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की है। कृषि का दर्जा मिलने से मत्स्य पालन के क्षेत्र में जिला अब और तेजी से आगे बढ़ेगा। जिले में मत्स्य पालन के लिए अभी मछुआरों को एक प्रतिशत ब्याज पर एक लाख तक तथा 3 प्रतिशत ब्याज पर अधिकतम 3 लाख रूपये तक ऋण मिलता था। कृषि का दर्जा मिलने से अब मत्स्य पालन से जुडे लोग सहकारी समितियों से अब अपनी जरूरत के अनुसार शुन्य प्रतिशत ब्याज पर सहजता से ऋण प्राप्त कर सकेंगे। किसानों की भांति अब मत्स्य पालकों ...

मछली पालन को अपनाकर मुनाफा कमाने लगे किसान : कृषक रूखमणी ठाकुर सात तालाबों में कर रही मछली पालन

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फुटकर मछली विक्रेताओं को भी मिला रोजगार रायपुर/छ.ग./मत्स्य पालन के व्यवसाय से होने वाले फायदा को देखते हुए धान की खेती करने वाले किसान भी अब मछली पालन व्यवसाय से सीधे जुड़ने लगे हैं और स्वरोजगार के साथ-साथ अन्य लोगों को रोजगार उपलब्ध करा रहे हैं। चारामा विकासखण्ड के ग्राम मैनखेड़ा निवासी श्रीमती रूखमणी ठाकुर ने अपने 16 एकड़ खेत में 07 तालाब का निर्माण किया है, जिसमें उनके द्वारा मछली पालन का कार्य किया जा रहा है, जिससे उन्हें प्रतिवर्ष प्रति एकड़ लगभग 01 लाख 25 हजार रूपये तक की शुद्ध आमदनी हो रही है। श्रीमती रूखमणी ठाकुर ने बताया कि उनके द्वारा पहले अपने खेत में धान की खेती की जा रही थी, जिसमें लागत और श्रम दोनों बहुत लगता था तथा फायदा भी ज्यादा नहीं होता था। जब उन्होंने मछली पालन से होने वाले फायदों के बारे में सुना तथा तालाब निर्माण के लिए शासकीय मदद मिलने की जानकारी प्राप्त हुई, जिससे वे प्रेरित होकर शासन की योजना अंतर्गत राष्ट्रीय कृषि विकास योजना से ढाई एकड़ खेत में तालाब बनवाया, जिसमें उन्हें मछली पालन विभाग से 02 लाख 80 हजार रूपये का अनुदान दिया गया। मछलीपालन में हुए लाभ को देखते हुए...

मछली पालन को कृषि का दर्जा मिलने से किसानों में उत्साह : जांजगीर-चांपा जिले के 6500 मत्स्य पालकों को मिला रोजगार

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रायपुर/छ.ग/छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा मछली पालन को कृषि का दर्जा देने से राज्य के किसानों में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। जांजगीर-चांपा जिले के 7 हजार 397 तालाबों तथा 86 जलाशयों में मत्स्यपालन किया जा रहा है, जो हजारों लोगों के लिए आमदनी का माध्यम बना है। जिले के 6 हजार 500 मत्स्य पालक इस व्यवसाय से जुड़कर अपना जीवन-यापन कर रहे हैं। जिले के मत्स्य पालकों को विभिन्न शासकीय योजनाओं का लाभ दिया जा रहा है। इससे वे आर्थिक रूप से समृद्ध हो रहे हैं। जल संग्रहण संरचनाओं के निर्माण से एक ओर जहां लोगों को रोजगार मिल रहा है, वहीं दूसरी ओर किसानों को अपनी फसल के लिए सिंचाई सुविधा भी मिल रही है। मछली पालन को कृषि का दर्जा मिलने से किसानों में उत्साह  जांजगीर-चांपा जिले में कृषि के साथ-साथ तालाबों और जलाशयों में बड़ी संख्या में मछली पालन का कार्य किया जा रहा है। जिले के 7 हजार 682 ग्रामीण तालाब जिनका जलक्षेत्र 10 हजार 442 हेक्टेयर है, जिसमें से 7 हजार 397 ग्रामीण तालाब (जलक्षेत्र 10 हजार 306 हेक्टेयर) में मछली पालन किया जा रहा है। जिले में सिंचाई जलाशय 86 (जलक्षेत्र 1 हजार 659 हेक्टेयर) में मत्स्य...

मछली पालन हेतु 10 वर्षीय पट्टा आबंटन के लिए 8 सितम्बर तक आवेदन आमंत्रित

रायगढ़/छ.ग./जनपद पंचायत खरसिया के अंतर्गत पंचायत के अधीनस्थ जलाशय रक्शापाली, नगोई, कुनकुनी, जोबी, सोनबरसा, बिलासपुर, फरकानारा एवं लोहाखान जलाशय को मछली पालन हेतु 10 वर्षीय पट्टा पर आबंटित किया जाना है। इच्छुक पंजीकृत मछुआरा सहकारी समिति का पंजीयन प्रमाण-पत्र, बायलॉज, सदस्यों की सूची, समिति का प्रस्ताव एवं ठहराव व विगत वर्षो की ऑडिट रिपोर्ट एवं राशन कार्ड, आधार कार्ड एवं बैंक पासबुक की छायाप्रति, मछुआ समूह, एसजीएसवाय समूह आवेदन प के साथ समूह का प्रस्ताव ठहराव, गरीबी रेखा सर्वे प्रमाण-पत्र (वर्ष 2002-03 अनुसार), जाति, निवास प्रमाण, राशन कार्ड, आधार कार्ड एवं बैंक पासबुक की छायाप्रति प्रस्तुत सहित आवेदन पत्र आवश्यक दस्तावेजों सहित 8 सितम्बर 2021 तक जनपद पंचायत खरसिया में जमा कर पावती प्राप्त कर सकते है। अपूर्ण आवेदन पत्रों पर जनपद पंचायत की बैठक में विचार नहीं किया जाएगा। इस संबंध में अन्य विस्तृत जानकारी के लिए कार्यालय जनपद पंचायत खरसिया, रायगढ़ में संपर्क कर सकते है।

मछलीपालन के लिए भी कृषि जैसे ही मिलेगी सस्ती बिजली और बिना ब्याज के ऋण की सुविधा - मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल

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अधिक से अधिक संख्या में मछुआ समुदाय के लोग भी उठाएं इन प्रावधानों का लाभ मुख्यमंत्री श्री बघेल छत्तीसगढ़ मछुआ कल्याण बोर्ड के उपाध्यक्ष और सदस्यों के पदभार ग्रहण कार्यक्रम में शामिल हुए रायपुर/छ.ग./मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने कहा है कि छत्तीसगढ़ में मछलीपालन को कृषि का दर्जा दिया गया है। अब मछलीपालन के लिए भी कृषि जैसे ही सस्ती बिजली और बिना ब्याज के ऋण की सुविधा मिलेगी। इससे मछलीपालन करने वालों को लाभ होगा और जो अपनी कमजोर आर्थिक स्थिति के कारण मछलीपालन नहीं कर पाते थे, वे भी मछलीपालन कर आय का साधन जुटा सकेंगे और आगे बढ़ेंगे। अधिक से अधिक संख्या में मछुआ समुदाय के लोग भी इन प्रावधानों का लाभ उठाने के लिए आगे आएं। मुख्यमंत्री ने आज यहां विधानसभा परिसर स्थित अपने कार्यालय कक्ष से छत्तीसगढ़ मछुआ कल्याण बोर्ड के उपाध्यक्ष और सदस्यों के पदभार ग्रहण कार्यक्रम को वर्चुअल माध्यम से सम्बोधित करते हुए इस आशय के विचार प्रकट किए। कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ मछुआ कल्याण बोर्ड के उपाध्यक्ष श्री राजेन्द्र ढीमर, सदस्य सर्वश्री दिनेश फूटान, देव कुंवर निषाद, आर.एन. आदित्य, प्रभु मल्लाह, विजय ढीमर और श्रीमती ...

डीएमएफ और मनरेगा से मत्स्यपालन को बढ़ावा देने की दिशा में बड़ा कदम

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मत्स्यपालन को बढ़ावा देने के लिए बनाई गई 423 डबरी अब धीरे-धीरे भर रही डबरी, पांच हजार रुपए मत्स्यपालन के लिए डीएमएफ के माध्यम से दी गई सहायता  मत्स्यपालन के क्षेत्र में बड़ी कारगर होंगी डबरी, मनरेगा और डीएमएफ के समन्वय से तैयार की गई अनूठी योजना से मत्स्यपालन के क्षेत्र में जल्द ही मिलेगी कारगर सहायता कलेक्टर डाॅ. सर्वेश्वर नरेंद्र भुरे ने किया धमधा ब्लाक के गाँवों में निर्मित डबरियों का किया निरीक्षण दुर्ग/छ.ग./ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविकामूलक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए कृषि एवं पशुपालन के साथ ही मत्स्यपालन को भी प्राथमिकता से जिला प्रशासन द्वारा फोकस किया जा रहा है। इस साल जिले में 423 डबरी बनाई गई हैं इनमें 293 डबरी व्यक्तिगत हितग्राहियों के लिए और 130 डबरी सामुदायिक बनाई गई है। मत्स्यपालन को बढ़ावा देने के लिए मत्स्यबीज एवं अन्य जरूरतों के लिए डीएमएफ के माध्यम से पांच हजार रुपए दिये गए हैं। आज कलेक्टर डाॅ. सर्वेश्वर नरेंद्र भुरे ने धमधा ब्लाक में निर्मित डबरियों का निरीक्षण किया। कलेक्टर ने व्यक्तिगत हितग्राहियों की डबरियों का निरीक्षण किया। हितग्राहियों ने बताया कि मनरेगा क...

छत्तीसगढ़ में अब मछुआरों को भी मिलेगा उत्पादन बोनस - 20 हेक्टेयर तक के जलक्षेत्र वाले एनीकट में स्थानीय मछुआरे कर सकेंगे निःशुल्क मत्स्याखेट

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कृषि एवं जल संसाधन मंत्री की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में राज्य की नवीन मछली पालन नीति बनाने के लिए गठित समिति ने की अनुशंसा रायपुर/छ.ग./मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल की मंशा के अनुरूप छत्तीसगढ़ राज्य की नवीन मछली पालन नीति का प्रस्ताव तैयार करने के लिए गठित समिति की बैठक आज कृषि एवं जल संसाधन मंत्री श्री रविन्द्र चैबे की अध्यक्षता में उनके रायपुर स्थित निवास कार्यालय में संपन्न हुई। बैठक में नवीन मछली पालन नीति में राज्य के मछुआरों को उत्पादकता बोनस दिए जाने की अनुशंसा की गई है। उत्पादकता बोनस राज्य के जलाशयों को पट्टे पर दिए जाने से होने वाली आय का 40 प्रतिशत होगा, जो मत्स्याखेट करने वाले मछुआरों को दिया जाएगा। नवीन मछलीपालन नीति में राज्य के ऐसे एनीकट, जिनका जलक्षेत्र 20 हेक्टेयर तक है, उन्हें मत्स्य पालन के लिए पट्टे पर नहीं दिए जाने का प्रस्ताव समिति ने किया है। ऐसे एनीकट स्थानीय मछुआरों के मत्स्याखेट के लिए निःशुल्क उपलब्ध होंगे। मछुआ जाति के लोगों की सहकारी समिति को सर्वोच्च प्राथमिकता के आधार पर जलाशयों को मत्स्य पालन के लिए पट्टे पर दिया जाएगा। आदिमजाति मछुआ सहकारी समिति, मछली प...

मछुआरों को भी अब किसानों की तरह ऋण एवं अन्य सुविधाएं मिलेंगी- मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल

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ठकुराइन टोला में भगवान शिव के दर्शन किए और निषाद समाज के कार्यक्रम में शामिल हुए मुख्यमंत्री   रायपुर/छ.ग./मत्स्य पालन को खेती का दर्जा देकर राज्य सरकार ने मछुआरों को हित में निर्णय लिया है। सरकार के इस निर्णय से राज्य के मछुआरों को अब किसानों की तरह ऋण एवं अन्य सुविधाएं मिलेंगी। सहकारी बैंकों से मछुआरों को सहजता से ऋण मिलेगा। यह बातें मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने ठकुराइन टोला में निषाद समाज द्वारा आयोजित कार्यक्रम के अवसर पर कही। मुख्यमंत्री ने यहां मंदिर में भगवान शिव के दर्शन कर पूजा-अर्चना की।मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने इस अवसर पर लोगों को महाशिवरात्रि पर्व की बधाई देते हुए कहा कि आज पावन त्यौहार है। आप सभी के ऊपर भगवान शिव की कृपा बनी रहे। मुख्यमंत्री ने कहा कि निषाद समाज सामाजिक कार्यों में अग्रणी रहा है। निषाद राज रामायण के आदर्श पात्र रहे हैं। भगवान श्री राम जब अयोध्या वापस लौटे और उनके राज्य अभिषेक की तैयारी की जाने लगी, तो उन्होंने सबसे पहले पूछा कि निषादराज को आमंत्रित किया गया है या नहीं। मुख्यमंत्री ने कहा कि गणतंत्र दिवस के मौके पर दूसरे देशों के अति...